

**🔴🚨 मथुरा में धार्मिक आह्वान के नाम पर बड़ा बवाल! शराब ठेका जबरन बंद कराने पहुंचे चार युवक गिरफ्तार — अदालत ने भी दिखाई सख्ती, 9 दिसंबर तक जेल भेजा; प्रशासन ने दी चेतावनी: “भीड़तंत्र नहीं चलेगा”
📌 एक्सक्लूसिव विस्तृत रिपोर्ट ✍️ एलिक सिंह, संपादक – Vande Bharat Live TV News | संपर्क: 8217554083
उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक शहर मथुरा में हाल ही में हुई एक चौंकाने वाली घटना ने कानून-व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। यहाँ प्रसिद्ध कथावाचक बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री के आह्वान के बाद सुनरख रोड स्थित शराब ठेके को जबरन बंद कराने पहुंचे चार युवकों — दक्ष चौधरी, अभिषेक ठाकुर, अमित और दुर्योधन — को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वायरल वीडियो में सभी आरोपी शराब ठेका बंद कराते और शटर गिराते दिखाई दे रहे थे। यह कार्रवाई किसी भी अधिकृत प्रशासनिक आदेश के बिना की गई थी, जिसके चलते पुलिस ने इसे भीड़तंत्र और कानून हाथ में लेने की खुली चुनौती माना।
🔻 घटना कैसे शुरू हुई?
घटना की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर धीरेंद्र शास्त्री के एक वीडियो क्लिप का हवाला देते हुए कुछ स्थानीय युवकों ने मथुरा के सुनरख रोड क्षेत्र में स्थित शराब दुकान को “धर्म और संस्कृति के विरुद्ध” बताते हुए इसे बंद करने का अभियान छेड़ दिया। अभियान के नाम पर युवक अचानक ठेका पर पहुँचे और दुकान के कर्मचारियों को धमकाते हुए शटर गिरा दिया। किसी भी प्रशासनिक आदेश या अनुमति के बिना की गई यह हरकत क़ानूनन पूर्ण रूप से अवैध थी।
कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिससे मामला पुलिस तक पहुँचा और तुरंत FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
🔻 पुलिस की तेज़ कार्रवाई — चारों आरोपी गिरफ्तार
मथुरा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चारों युवकों को चिन्हित किया।
⦿ दक्ष चौधरी
⦿ अभिषेक ठाकुर
⦿ अमित
⦿ दुर्योधन
वीडियो में साफ़ दिखाई देने के कारण पहचान में कोई कठिनाई नहीं हुई। पुलिस टीमों ने लगातार दबिश देकर चारों को गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया।
🔻 अदालत की कड़ी टिप्पणी — जमानत खारिज
चारों आरोपियों ने गिरफ्तारी के बाद जमानत याचिका दाखिल की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि “कानून व्यवस्था की अवहेलना को बढ़ावा देने वाले कृत्य समाज में गलत संदेश देते हैं। ऐसी गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।”
अदालत ने उन्हें 9 दिसंबर 2025 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
🔻 प्रशासन: “धार्मिक आह्वान, भावनाएँ या निजी आग्रह — कानून से ऊपर नहीं”
जिलाधिकारी और एसएसपी मथुरा ने संयुक्त बयान में कहा कि:
“यह शहर धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र है, लेकिन धार्मिक भावनाओं के नाम पर कानून हाथ में लेने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि भीड़तंत्र, स्वयंभू सामाजिक सुधारकों या किसी भी प्रकार के दबाव समूह की अवैध गतिविधियों पर पुलिस तत्परता से कार्रवाई करेगी।
🔻 सोशल मीडिया पर बहस — “धर्म की रक्षा” बनाम “कानून का शासन”
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो खेमों में बंट गया—
🔸 एक पक्ष इसे “धार्मिक भावना की रक्षा” बता रहा है।
🔸 दूसरा पक्ष इसे “कानून तोड़ने की खुली कोशिश” और “धर्म के नाम पर अराजकता” करार दे रहा है।
लेकिन पुलिस और प्रशासन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है — कानून सर्वोपरि है।
🔻 शराब ठेका मालिक सुरक्षित — व्यापार पुनः शुरू
पुलिस ने शराब ठेके की सुरक्षा बढ़ा दी है और उसके संचालन को सामान्य कर दिया गया है। व्यापारियों को यह आश्वासन दिया गया है कि किसी भी संगठन या भीड़ के दबाव में कोई दुकान, प्रतिष्ठान या निजी संपत्ति बंद नहीं कराई जाएगी।
🔻 आगे की जांच
जाँच यह भी की जा रही है कि:
✔️ क्या इस हरकत के पीछे कोई संगठित समूह था?
✔️ क्या युवकों को किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति या संस्था का समर्थन प्राप्त था?
✔️ क्या यह सब पूर्व-नियोजित अभियान था?
पुलिस इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।
मथुरा जैसे संवेदनशील धार्मिक शहर में इस प्रकार की हरकतें न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देती हैं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को भी प्रभावित करती हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अदालत की सख्ती से स्पष्ट संदेश गया है कि कानून हाथ में लेने वाली किसी भी भीड़ या समूह को क्षमा नहीं किया जाएगा।

